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Computer History in Hindi

गिनतारा( Abacus ) :- गणना करने की सर्वप्रथम यन्त्र का अविष्कार अबेकस के रूप में लगभग 600 ईसा पूर्व चीन में हुआ था। अबेकस को सोरोबोन के नाम से भी जाना जाता है।

अबेकस तारों का एक ढ़ाँचा होता है इन तारो में पक्की मिट्टी के गोल मोती या प्लास्टिक की गोलियाँ पिरोयी रहती है। अबेकस का प्रयोग अंकों को जोड़ने,घटाने,गुणा व भाग जैसी गणनाएं करने में होती थी। गणना करने के लिए अबेकस के इन मोतियों को तारों पर सरकाया जाता है।

पास्कलाइन :- पास्कलाइन घड़ी और ऑडोमीटर के सिद्धान्त पर कार्य करता है। सन् 1942 ईo में ब्लेज पास्कल ने पहला यान्त्रिक गणना करने का यन्त्र बनाया जिसे एडिंग मशीन कहा गया। यह यन्त्र मात्र जोड़ने व घटाने की गणनाएँ करता था। पास्कल द्वारा बनाई गई इस यन्त्र को पास्कलाइन कहा गया।

जेकार्ड का लूम :- फ्रांस के एक बुनकर जोसेफ़ जेकार्ड ने सन् 1704 ईo में कपड़े बुनने के एक ऐसे लूम का आविष्कार किया जो कपड़ों के डिज़ाइन का पैटर्न स्वतः ही देता था तथा इसका नियन्त्रण कार्ड बोर्ड के छिद्रयुक्त पंचकार्डो द्वारा करता था। इसके धागो का निर्देशन पंचकार्ड पर छिद्रों की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति द्वारा किया जाता था।पंचकार्ड के प्रयोग से दो विचारधाराएं उत्पन्न हुई जो निम्नलिखित है –

  • सूचना को पंचकार्ड पर अंकित किया जा सकता था।
  • पंचकार्ड पर संग्रहित सूचना को निर्देशों का समूह माना जा सकता है जोकि प्रोग्राम के रूप में कार्य करता है।

डिफरेंस इंजन :- कैम्ब्रिजविश्वविद्यालय के गणित के प्रोफेसर चार्ल्स बैबेज जिन्हे आधुनिक कंप्यूटर का जनक कहा जाता है उन्होने एक ऐसा यन्त्र तैयार किया जो विभिन्न बीजगणितीय फलनों का मान दशमलव के 20 स्थानों तक शुध्दतापूर्वक ज्ञात कर सकता था। इस मशीन को डिफरेंस इंजन कहा जाता था।

प्रारम्भ के कुछ प्रसिध्द कम्प्यूटर 

मार्क – 1 कम्प्यूटर :- हावर्डविश्वविद्यालय के डॉo हावर्ड एo एकिन ने IBM (International Business Machine) के साथ मिलकर पहला पूर्णरूपेण स्वचालित गणना करने का यन्त्र बनाया जिसका नाम Automatic Sequence Controlled Calculator रखा। यह हावर्डविश्वविद्यालय का सबसे पहला विद्युत यांत्रिक कंप्यूटर था। यह कम्प्यूटर बनावट में अत्यधिक जटिल व आकार में अत्यधिक बड़ा था। यह लगभग 50 फुट लम्बा व 8 फुट ऊँचा था। इसमें लगभग 3,000 से अधिक विद्युत संयोजित स्विच थे। जिनकी सहायता से जोड़,घटाना,गुणा,भाग आदि क्रियाएं सम्पूर्ण होती थी। इस यन्त्र में 23 दशमलव अंकीय संख्या प्रयुक्त हो सकती थी।

प्रथम इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर (ABC) :- भौतिक एवं गणित के प्रोफ़ेसर डॉo जान बिनसेंट एटानासाफ ने प्रथम इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर बनाया जिसका नाम ABC (Attanasaff-Berry Computer) रखा। इस कम्प्यूटर का उपयोग समीकरणों का समाधान करने के लिए बनाया गया था।

ENIAC :-ENIAC का पूरा नाम Electronic Numerical Integrator And Calculator है। इस कम्प्यूटर का निर्माण सन् 1940 में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की सेना के प्रयोग के लिए किया गया था। यह एक विशाल कंप्यूटर था जिसमे 18,000 वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया गया। इसका भार 30 टन था। तथा यह 5000 वर्ग फुट क्षेत्रफल में फैला था। यह लगभग 300 गुणन प्रति सेकंड कर सकता था। यह अपने समय का तीव्रतम यन्त्र था।

EDSAC :- EDSAC का पूरा नाम Electronic Delay Storage Automatic Calculator है। यह सबसे पहला संग्रहित प्रोग्राम कम्प्यूटर था। इसे सन् 1940 में वान न्यूमन के सिद्धांत के आधार पर प्रोफेसर मौरिस विल्कस ने विकसित किया जो कि गणित प्रयोगशाला कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय USA में थे।

EDVAC :- EDVAC का पूरा नाम Electronic Discrete Variable Automatic Computer है। सन् 1950 में वान न्यूमैन ने EDVAC का विकास किया जिसमें अंकगणितीय क्रियाओं हेतु Binary अंक प्रणाली का प्रयोग किया गया तथा निर्देशों को भी Digital प्रारूप में ही संग्रहित किया गया। इस कम्प्यूटर में Punched Papar Tape का प्रयोग किया गया।

UNIVAC :- UNIVAC का पूरा नाम Universal Automatic Computer है। इस कम्प्यूटर का विकास सन् 1946 से 1951 के मध्य एक्कर्ट एवं मुचली ने अपनी संस्था में व्यापारिक अनुप्रयोगों हेतु किया। किन्तु जल्द ही यह बेकार सिद्ध हो गया।

UNIVAC – 1 :- सन् 1954 ईo में यूनिवेक में थोड़ा परिवर्तन कर यूनिवेक -1 नामक कम्प्यूटर विकसित किया गया जिसका व्यापारिक अनुप्रयोग सर्वप्रथम जनरल इलेक्ट्रिक कम्पनी ने किया। यह प्रथम व्यापारिक एवं वाणिज्यिक महत्त्व का कंप्यूटर था।

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