अनुकरण का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं शिक्षा में उपयोगिता

अनुकरण का अर्थ 

अनुकरण को अंग्रेजी में Imitation कहते हैं। अनुकरण का सामान्य अर्थ होता है – “किसी व्यक्ति या समूह के कार्य, व्यवहार या गुणों की चेतन या अचेतन रूप से नक़ल करना।”

अर्थात अनुकरण एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है जिसके कारण एक व्यक्ति दूसरे के व्यवहार, विचारों, भावों, कार्यों एवं क्रियाओं को देखकर स्वयं ठीक उसी प्रकार नक़ल करता है।

अनुकरण के अर्थ को समझने के लिए मनोवैज्ञानिको ने निम्नलिखित परिभाषाएँ दी हैं –

मैक्डूगल के अनुसार, “एक व्यक्ति द्वारा दूसरों की प्रक्रियाओं या शारीरिक गतिविधियों की नक़ल करने की प्रक्रिया को अनुकरण कहते हैं।”

मीड के अनुसार, “दूसरों के कार्यों या व्यवहारों को जानबूझ कर अपनाना अनुकरण कहलाता है।”

रॉस के अनुसार, “अनुकरण सामूहिक भावना का क्रियात्मक पक्ष है, जिसके द्वारा समुदाय के सभी सदस्य एक साथ कार्य करते हैं।”

हेज के अनुसार, “अनुकरण सामाजिक संकेत की एक उपजाति है। वह बाह्य क्रिया के लिए दिया गया एक विचार है जो प्राप्त करने के बाद क्रियान्वित किया जाता है।

अनुकरण के प्रकार 

ड्रेवर के अनुसार,

ड्रेवर ने अनुकरण के दो प्रकार बताये हैं –

  1. अज्ञात या अचेतन अनुकरण
  2. ज्ञात या चेतन अनुकरण

अज्ञात या अचेतन अनुकरण 

इस प्रकार के अनुकरण को बालक किसी दूसरे के कार्यों की नक़ल बिना सोंच – विचार के अनजाने में करने लगता है। इस प्रकार का अनुकरण शैक्षिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होता है। क्योकि इस अनुकरण के द्वारा बालक वातावरण की बहुत सी बातें बिना प्रयास के सीख जाता है।

जैसे – बोलना, खाने – पीने का ढंग, कपड़े पहनने का ढंग, वेशभूषा आदि।

ज्ञात या सप्रयत्न अनुकरण  

इस प्रकार के अनुकरण को बालक चेतन रूप से जानबूझकर किसी के आचरण और व्यवहार की नक़ल करने का प्रयत्न करता है। यह अनुकरण बालक के रूचि और इच्छा शक्ति पर आधारित होती है।

मैक्डूगल के अनुसार,

मैक्डूगल के अनुसार अनुकरण पाँच प्रकार के होते हैं –

  1. सहज अनुकरण
  2. विचारपूर्ण
  3. भाव – चालक अनुकरण
  4. निरर्थक अनुकरण
  5. विचाररहित अनुकरण

सहज अनुकरण 

यह अनुकरण प्रायः बालक के शैशवकाल में देखने को मिलता है। सहज अनुकरण के अन्तर्गत बालक दूसरों को हँसते देखकर हंसने लगता है तथा दूसरे को दुखी देखकर स्वयं दुखी का अनुभव आदि क्रियाएं करने लगता है।

इस प्रकार का अनुकरण अचेतन रूप में होता है।

विचारपूर्ण अनुकरण 

विचारपूर्ण अनुकरण में बालक दूसरे के कार्यों या आदर्शों का अनुकरण विचारपूर्वक करता है।

भाव – चालक अनुकरण

भाव – चालक अनुकरण में बालक दूसरों के कार्यों या विचारों की नक़ल करते हुए उनका क्रियात्मक रूप से प्रदर्शन भी करता है।

जैसे – खेल देखते समय खिलाड़ी के हाथ पैर की गति देखकर हमारे मस्तिष्क में ऐसे भाव उठते हैं कि उसी खिलाड़ी की तरह हाथ पैर में गति होने लगती है।

निरर्थक अनुकरण 

निरर्थक अनुकरण शिशुओं में पाया जाता है शिशु दूसरों के व्यवहार और क्रियाओं को बिना विचार किये हुए नक़ल करते हैं।

जैसे – शिशु किसी को हँसता देखकर स्वयं भी हंसने लगता है।

विचाररहित अनुकरण 

विचाररहित अनुकरण भावाचालक अनुकरण तथा विचारपूर्ण अनुकरण के मध्य का होता है। इसमें बालक का अचेतन मन कार्य करता है।

जैसे – किसी बालक को तालाब के पानी में कंकड़ फेकते हुए देखकर स्वयं भी उसी प्रकार पानी में कंकड़ फेकना।

अनुकरण का शिक्षा में उपयोगिता 

अनुकरण का शिक्षा में निम्नलिखित उपयोगिता है –

  • अनुकरण में बालक चेतन रूप से सीखने का प्रयास करता है।
  • अनुकरण द्वारा सीखने में सरलता होती है और सीखने में कम समय लगता है।
  • प्रारम्भिक शिक्षा बालक अनुकरण के द्वारा ही सीखता है।
  • भाषा विकास में अनुकरण का विशेष स्थान है। बालक शुद्ध भाषा और शुद्ध उच्चारण अनुकरण द्वारा ही सीखता है।
  • अनुकरण मानसिक विकास का महत्वपूर्ण साधन है।
  • आदतों का निर्माण भी अनुकरण के द्वारा होता है। अतः अभिभावकों और शिक्षकों को सदा अच्छे वातावरण का निर्माण करने का प्रयत्न करना चाहिए।
  • अनुकरण आत्म अभिव्यक्ति का साधन है।
  • अनुकरण द्वारा बालक के रचनात्मक प्रवृत्तियों का विकास होता है।

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